कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक.
आज हमारे देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों के खेती में कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है। हमारे खाने में मीठा जहर परोसा जा रहा है, जो सिंचाई जल और कीटनाशकों के जरिए अनाज, सब्जियों और फलों में शामिल हो रहा है। कीटनाशक के ज्यादा इस्तेमाल से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है तथा यह कीटनाशक जमीन में रिसकर भूजल को जहरीला बना रहा है। नदियों तालाबों तथा अन्य जलस्रोतों में बहकर वहां के पानी को जहरीला बनाता है जिससे इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंच रहा है.
रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हुई तो हुई, उनका किसानों और खेतिहर मजदूरों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ने लगा। कीटनाशकों के संपर्क और फसलों में आए उनके खतरनाक असर से किसानों में कैंसर समेत अनेक गंभीर बीमारियां पनपीं। चूंकि रासायनिक खादों और कीटनाशकों का सबसे ज्यादा असर पंजाब में हुआ था, तो इसे ही इसका भयंकर नुकसान झेलना पड़ा। बीते कुछ वर्षों में पंजाब के बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर, फिरोजपुर, संगरूर और मानसा जिलों में बड़ी तादाद में किसान कैंसर के शिकार हो रहे हैं। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र, चंडीगढ़ स्थित पीजीआई और पंजाब विश्वविद्यालय समेत खुद, सरकार की ओर से कराए गए अध्ययनों में ये तथ्य उजागर हो चुके हैं कि कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से इन जिलों में कैंसर का फैलाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।.
इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकार में यह इच्छाशक्ति जरा सी भी नहीं दिखलाई देती कि वह कीटनाशकों के इस्तेमाल को रोकने या सीमित करने के लिए कुछ खास कदम उठाए। कुछ ऐसा करे कि कीटनाशकों का इस्तेमाल हतोत्साहित हो। जब भी रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से पैदा होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों की बात उठती है, तो यह दलील दी जाती है कि इस पर रोक लगाने से पैदावार कम हो जाएगी। देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी, लेकिन ज्यादा पैदावार किस शर्त पर मिल रही है, इसे जानते-बूझते नजरअंदाज कर दिया जाता है। खाद्य सुरक्षा का मतलब किसी भी तरह पैदावार का बढ़ाना नहीं होता। खाद्य ऐसा होना चाहिए, जो सेहत के लिए भी मुफीद हो। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से न सिर्फ इंसान और जीव-जंतुओं की सेहत पर असर पड़ रहा है, बल्कि जमीन के उपजाऊपन में भी कमी आ रही है। अब वक्त आ गया है कि सरकार अपनी कृषि नीतियों का पुनरावलोकन करे। आधुनिक कृषि प्रणाली के फायदे और नुकसान का सही-सही जायजा ले। सरकार की ओर से कीटनाशकों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने और खेती के ऐसे तौर-तरीकों को बढ़ावा देने की पहल होनी चाहिए, जो सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए अनुकूल हों, तभी जाकर खेत और किसान सुरक्षित रहेंगे।
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