लेकिन सर इतने सालों बाद भी कोई तरक्की नही हो पाई अब तो कुछ और करने दो...
कहीं नही जाने दूंगा..
सर घर का खर्च चलाने के लिये कर्जा हो रहा है प्लीज अब तो जाने दो...
कहीं नहीं जाने दूंगा..
ठीक है सर तो मेरे घर का खर्चा अब आप ही चला लो..
जा चला जा..
ऊपर लिखी बातों से आप समझ ही गये होंगे कि यह बात अपलाइन और डाउनलाइन के बीच की है।।
कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है जहाँ किसी की तरक्की या कामयाबी से मतलब नही है बस आँखे गड़ा रखी हैं कि मेरी डाउनलाइन कहीं दूसरी कंपनी को जॉइन ना कर ले।।
अचानक से आपके पास ऐसे अपलाइन का फ़ोन आ सकता है जिसने महीनों या सालों से आपका खैर ख्याल ना पूछा हो।।
यह फ़ोन तभी आयेगा जब आपने किसी दूसरी कंपनीं को करने का मन बना लिया हो।।
मुझे लगता है कि अगर किसी व्यक्ति का सालों बाद भी कोई अचीवमेंट ना हो और कमाने के लाले पड़े हों तो अपलाइन को शर्मिन्दा होने की आवश्यकता है नाकि दबाव डालने की।।
हर नेटवर्किंग प्लान हर व्यक्ति के लिये नही है कुछ प्लान नवरत्नों के लिये है तो कुछ बड़े लीडर्स के लिये जिनका गणित सिर्फ इन्हीं को समझ आता है।।
किसी के जीवन या भविष्य पर कोई प्रश्नचिन्ह लगाये ऐसा अधिकार किसी के पास भी नही है।।
अचानक दोस्ती की बात करने वाले दुश्मनी पर कैसे उतारू हो जाते हैं।।
हर कोई अपने घर की हालत को जानता है।। सबके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियां हैं और ऐसे में अपलाइन या खुद कंपनी भी बस अपने ही टारगेट पर फोकस किये हैं नाकि किसी की बुनियादी जरूरतों पर।।
मुझे नही लगता कि अगर कोई व्यक्ति 3 - 5 साल बाद भी कंपनी को बदलने की सोचे तो उस पर सारे अपलाइन मिलकर चढ़ाई कर डाले।। ये अधिकार भला किसी को दिया भी किसने।।
तालियां बजाते बजाते कोई थक गया है और उससे नही हो पा रहा आपके प्लान पर काम तो .. जाने दो उसे।। वरना कर लो सेटिंग और देना शुरू करो उसे घर का खर्चा-पानी, क्योंकि अब आपकी Education या Motivation से उसका उद्धार नही हो रहा।।
कम से कम अपनी गलती ना भी मानो लेकिन किसी की राह का रोड़ा भी मत बनो।।
आज का मैसेज उनके लिये जो किसी के जीवन पर बेवजह नाग बने बैठे हैं।। बख्श दो लोगों को और अपने अंदर जरूरी बदलाव कर लो वरना आज एक गया है कल को पूरा नेटवर्क सपाट मैदान बन जायेगा।।