Sunday, May 5, 2019

Take Care Of Your Kidney

कब आपको किडनी की जांच करवाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए?

कब आपको किडनी की जांच करवाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए?

खून साफ करने के अलावा भी किडनियों के कई काम हैं और यही वजह है कि इनमें खराबी भी कई तरह के लक्षणों से सामने आती है

डॉक्टरी है तो विज्ञान ही, लेकिन इस मामले में वह रहस्यमय और जादूनुमा हो जाता है कि यहां दो और दो को जोड़ने पर प्राय: चार नहीं बनते. डॉक्टरी में गणित प्राय: गलत ही साबित होता है पर यह बात सामान्यजन के गले नहीं उतरती. वह मान तथा जान ही नहीं पाता कि यदि डॉक्टर ने ईसीजी ठीक बताया था तो फिर मरीज एक घंटे बाद ही हार्ट अटैक से कैसे मर गया या कि यदि खून की रिपोर्ट में मलेरिया नेगेटिव बताया गया है तो भी डॉक्टर ने मलेरिया का इलाज क्यों दिया. ऐसा तमाशा किडनी की बीमारियों के केस में सबसे ज्यादा है. विशेष तौर पर किडनी फेल्योर के मामले में किडनी या गुर्दे के विषय में बताने को इतनी सारी बातें हैं कि एक कॉलम में तो नहीं समझाई जा सकतीं. अगले एक-दो अंकों में हम इस विषय पर पूरी बात करने का प्रयास करेंगे.

किडनी एक बेहद स्पेशलाइज्ड अंग है. इसकी रचना में लगभग तीस तरह की विभिन्न कोशिकाएं लगती हैं. यह बेहद पतली नलियों का अत्यंत जटिल फिल्टर है जो हमारे रक्त से पानी, सोडियम, पोटेशियम तथा ऐसे अनगिनत पदार्थों को साफ करके पेशाब के जरिए बाहर करता है.

यह फिल्टर इस मामले में अद्भुत है कि यहां से जो भी छनकर नली से नीचे आता है उसे किडनी आवश्यकतानुसार वापस रक्त में खींचती भी रहती हैं, और ऐसी पतली फिल्ट्रेशन नलियों की तादाद होती है? एक गुर्दे में ढाई लाख से लगाकर नौ लाख तक नेफ्रान या नलियां रहती हैं. हर मिनट लगभग एक लीटर खून इनसे प्रवाहित होता है ताकि किडनी इस खून को साफ कर सके.

एक दिन में लगभग डेढ़ हजार लीटर खून की सफाई होती है. और गुर्दे केवल यही काम नहीं करते बल्कि यह तो उसके काम का एक पक्ष है, जिसके बारे में थोड़ा-थोड़ा पता सामान्यजनों को भी है परंतु क्या आपको ज्ञात है कि किडनी का बहुत बड़ा रोल प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट (शक्कर आदि) तथा फैट (चर्बी) की मेटाबॉलिज्म (पाचन/चय-अपचय) में भी है. इसलिए किडनी खराब होने पर कुपोषण के लक्षण हो सकते हैं.

हार्मोंस के प्रभाव में भी गुर्दों का बेहद अहम किरदार है. गुर्दे में बनने वाला इरिथ्रोपॉइरिन नामक पदार्थ खून बनाने वाली बोनमैरो को (बोनमैरो को आप हड्डियों में खून बनाने वाली फैक्टरी कह सकते हैं) खून बनाने के लिए स्टिम्यूलेट करता है. यह न हो तो शरीर में खून बनना बंद या कम हो जाता है. इनमें बहुत-सी बातों से स्वयं डॉक्टर भी परिचित नहीं होंगे. या उन्होंने कभी पढ़ा तो था पर अब याद नहीं. नतीजा कई डॉक्टरों का भी इस महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान नहीं जाता कि किडनी फेल होने वाला मरीज पेशाब की शिकायत या सूजन के अलावा और भी कई तरह से सामने आ सकता है.

सवाल ये है कि हमें कब सतर्क होकर किडनी का टेस्ट कराना चाहिए, कौन से लक्षण हैं जो किडनी फेल्योर की ओर इंगित कर सकते हैं?

Vikash Swarnkaar

Author & Editor

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