अगर आप आप अपनी बंधी-बंधाई इनकम से खुश नहीं हैं या एक्सट्रा कमाना चाहते हैं तो आप कुछ ऐसे तरीके अपना सकते हैं, जिससे आप अपने रूटीन काम के अलावा दो से चार घंटे का समय निकाल कर अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। इस साइड इनकम से आपकी कई समस्याएं हल हो सकती हैं,
पैसा ज़िंदगी के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है| हर व्यक्ति अपने जीवन के एक निश्चित समय के पश्चात उस दौर मे आता है, जब वह पैसा कमाने लगता है या पैसा कमाना चाहता है। आज कल हमारी पढ़ाई हमारा ज्ञान इस तरह का है कि हम सब के दिमाग मे कुछ न्यू आइडियास होते है| आजकल के युवाओ का कुछ नया करने का जुनून देखते ही बनता है। परंतु यह जरूरी नहीं है कि हम सब नया बिज़नेस शुरू करने के लिए सक्षम हो और अगर नये बिज़नेस की शुरूवात कर भी लेते है, तो उसे उसी तरह से चलाये रखना भी आसान बात नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति अपना खुद का बिज़नेस स्टार्ट करना चाहता है तो उसके लिए जरूरत होती है अच्छी प्लानिंग की और बिज़नस शुरू करने के लिए पर्याप्त राशि की। इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है कि आप कम पैसे मे अपना स्वयं का बिज़नेस स्टार्ट नहीं कर सकते । यहा हम कुछ बिज़नेस आइडियास की लिस्ट दे रहे है जिससे आप अपना स्वयम के बिज़नेस का शुभारंभ कम राशी मे भी कर सकते है।
भारत में डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ बेहतर है और वित्त वर्ष 2019-20 तक इस इंडस्ट्री के 3.4 करोड़ डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। ग्रोथ की इस संभावना को देखते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग के रेग्यूलेशन के लिए एक व्हाइटपेपर जारी करते हुए कहा है कि देश में मौजूदा रेग्यूलेटरी अनिश्चितता को खत्म करने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड रेग्यूलेटरी मेकानिज्म की स्थापना की जरूरत है। क्या है सुझाव भारत सरकार के पूर्व लॉ सेक्रेटरी केएन चतुर्वेदी द्वारा तैयार ड्राफ्ट बिल के इनपुट के आधार पर तैयार इस व्हाइटपेपर में सुझाव दिया गया है कि जिस तरह से सभी तरह के इन्वेस्टमेंट के लिए सेबी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है उसी तरह डायरेक्ट सेलिंग के लिए भी देश में संचालित सभी डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के लिए भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन प्रोसेस शुरू की जाए। डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री में कंपनियों का रजिस्ट्रेशन प्रस्तावित सेंट्रल रेग्यूलेटरी बॉडी द्वारा ही किया जाना चाहिए। डायरेक्ट सेलिंग को परिभाषित करने की जरूरत आईआईसीए के व्हाइटपेपर में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग को स्पष्ट परिभाषित करने की तुरंत आवश्यकता है, जिससे कानूनी रूप से डायरेक्ट सेलिंग और पोंजी व पिरामिड स्कीमों के बीच आसानी से स्पष्ट अंतर किया जा सके। इस अंतर से डायरेक्ट सेलर्स और कंज्यूमर्स दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। डायरेक्ट सेलिंग के लिए नहीं कोई कानून वर्तमान में भारत में डायरेक्ट सेलिंग के लिए कोई अलग से कानून नहीं है। अलग-अलग राज्यों में इन डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां को विभिन्न कानूनों जैसे कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट और प्राइज चिट एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैन) एक्ट 1978 के तहत रेग्यूलेट किया जा रहा है। यह सभी कानून पोंजी स्कीम पर प्रतिबंध लगाने के लिए हैं न कि डायरेक्ट सेलिंग को रेग्यूलेट करने के लिए। 1980 से हुई शुरुआत भारत में मॉडर्न डायरेक्ट सेलिंग की शुरुआत 1980 में स्मॉल इंडियन कंपनी यूरेका फोर्ब्स ने की थी। इसने अपने वैक्यूम क्लीनर्स की घर-घर बिक्री करने के लिए डायरेक्ट सेलर्स की भर्ती की थी। इसके बाद 90 के दशक में इंटरनेशनल कंपनियों जैसे एमवे और एवन के प्रवेश करने के बाद यह इंडस्ट्री बहुत तेजी से विकसित हुई। भारत में, डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री प्रमुख तौर पर हेल्थ और वेलनेस प्रोडक्ट्स, कॉस्मेटिक्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, वाटर प्यूरीफायर्स और लाइफ इंश्योरेंस की बिक्री का एक डिस्ट्रीब्यूशन चैनल है। ग्रोथ की है बहुत संभावना आईआईसीए के व्हाइटपेपर में कहा गया है कि भारत में बढ़ते मध्यम वर्ग और खर्च योग्य आय में वृद्धि होने से भविष्य में डायरेक्ट सेलिंग उत्पादों की मांग बहुत अधिक बढ़ेगी, यदि यहां उचित रेग्यूलेटरी सिस्टम हो तो डायरेक्ट सेलिंग का भविष्य बहुत उज्जवल होगा। 2013 तक डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री में भारत में 9.63 करोड़ लोगों को स्वयं रोजगार मिला हुआ है। दुनियाभर में डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री का आकार 185 अरब डॉलर का है। भारत में डायरेक्ट सेलिंग में मिले कुल रोजगार में 58.3 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं की है।
2020 तक डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री होगी 3.4 करोड़ डॉलर की.
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