Saturday, November 30, 2019

VLCC WELLSCIENCE Ginko Biloba एपिलेप्सी ke liye behtar

एपिलेप्सी

मिर्गी यानी एपिलेप्सी एक तंत्रिका सम्बन्धी विकार (न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर) है, जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते हैं। मस्तिष्क में किसी गड़बड़ी के कारण बार-बार दौरे पड़ने की समस्या हो जाती है। दौरे के समय व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है और उसका शरीर लड़खड़ाने लगता है।

मिर्गी को लेकर कई तरह की गलतफहमियां हैं। लोग सोचते हैं कि इसका इलाज नामुमकिन है या फिर इससे पीड़ित शख्स नॉर्मल जिंदगी नहीं जी सकता, लेकिन यह सच नहीं है। सही इलाज से मिर्गी से मुक्ति मुमकिन है।

क्या है मिर्गी
यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मरीज के दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होने लगती हैं। यह कुछ वैसा ही है जैसे कि शॉर्ट सर्किट में दो तारों के बीच गलत दिशा में तेज करंट दौड़ता है। इसमें मरीज को झटके-से महसूस होते हैं, वह जमीन पर गिर जाता है, दांत भिंच जाते हैं और वह कुछ देर के लिए बेहोश हो जाता है। 1 दिन के बच्चे से लेकर सौ साल के बुजुर्ग तक को मिर्गी हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार पूरी दुनिया में 5 करोड़ लोग मिर्गी से पीड़ित हैं।

किन स्थितियों में पड़ता है दौरा
बेहद तनाव
दवा मिस कर देना
कम नींद लेना
हॉर्मोंस में बदलाव
ज्यादा शराब पीना
ब्लड शुगर का गिर जाना
ब्लड प्रेशर का कम हो जाना
बेहद तेज रोशनी में आना

लक्षण
- आंखों के आगे अंधेरा छाना
- शरीर का अकड़ जाना
- दांत भिच जाना
- मुंह से झाग आना
- अचानक गिर जाना
- बेहोश हो जाना
- आंखों की पुतलियों ऊपर की तरफ खिंचना
- हाथ या पैर का लगातार चलना या झटके से लगना
- होंठ या जीभ काट लेना

कारण
जनेटिक: जीन्स में कोई गड़बड़ी हो, ब्रेन की नर्व्स ठीक से कम नहीं कर रही हों।
इन्फेक्शन: जन्म के वक्त बच्चे को पीलिया हो गया हो या फिर किसी और इन्फेक्शन से ब्रेन को पूरी ऑक्सिजन न मिली हो।
सिर पर गंभीर चोट: कभी मुक्केबाजी आदि या फिर किसी हादसे में सिर पर चोट लगी हो।
स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर: ब्रेन स्ट्रोक या ट्यूमर की समस्या हो।
गर्भ में चोट: अगर मां के पेट में बच्चे को चोट लग गई हो।
ऑटिजम होना: ऑटिजम की वजह से भी बच्चों में मिर्गी का दौरा संभव है।
बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने पर अगर दिमाग सुस्त पड़ गया हो।
दिमाग में टेपवर्म: न्यूरोसाइटिसरकोसिस (NCC) यानी दिमाग में टेपवर्म (कीड़ा) चला गया हो।
ब्रेन टीबी: अगर दिमाग की टीबी हो गई हो।
कैल्शियम और सोडियम की कमी से भी छोटे बच्चों में दौरा पड़ सकता है।
नोट: NCC से बचने के लिए फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं। सब्जियों को 15 मिनट नमक के गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। कच्चा सलाद न खाएं।

कितनी तरह की मिर्गी
मोटे तौर पर इस बीमारी को 3-4 कैटिगरी में बांटा जा सकता है:
Generalized Epilepsy: अगर पूरे दिमाग में करंट फैलता है और मरीज बेहोश हो जाता है। यह सबके कॉमन है।
Partial (focal) Epilepsy: इसमें करंट शरीर के एक हिस्से से निकलता है और उसी हिस्से में रहता है। मसलन आंख में , मेमरी पर हो सकता है।
Absence Seizures: इसमें मरीज कोई हरकत नहीं करता। गुमसुम बैठा रहता है। हाथ हिलने लगता या मुंह हिलाने लगता है लेकिन बात नहीं करता।
Complex Partial Seizures: इसके लक्षण भी कुछ-कुछ एब्सेंस सीज़र की तरह ही होते हैं

कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी
- दवा हमेशा घड़ी देखकर वक्त पर लें। इन दवाओं को बच्चों से दूर रखें।
- रोजाना 7-8 घंटे की भरपूर नींद लें और तनाव न पालें।
- फल-सब्जियों से भरपूर हेल्दी डाइट लें। ड्राइ-फ्रूट्स खाएं और डाइटिंग बिल्कुल न करें।
- मरीज ड्राइविंग न करें।
- स्वीमिंग न करें और न ही बाथटब में नहाएं।
- बहुत ऊंची जगहों पर न जाएं या कम-से-कम ऐसी जगहों पर न खड़े हों, जहां से गिरने का डर हो।
- एडवेंचर स्पोर्ट्स (डाइविंग, स्कूबा डाइविंग, पैराग्लाइडिंग आदि) में हिस्सा न लें।
- एक पर्ची पर अपना नाम, नंबर, घरवालों का नंबर और जरूरी दवा का नाम लिखकर अपने पर्स या जेब में रखें।
घरवाले रखें ध्यान
- मरीज के साथ बिल्कुल नॉर्मल तरीके से बर्ताव करें। अलग से अटेंशन न दें।
- घर में ऐसा फर्नीचर न रखें, जिसमें तीखे कोने हों। अगर हैं भी तो उनके कोनों में रबड़ के कैप लगवा दें।
- घर में खुले में कोयला न जलाएं, न ही बोन फायर आदि करे।
- घर में मिडाज़ोलम (Midazolam) नेज़ल स्प्रे रखें। दौरा पड़ने पर मरीज की नाक में इसे स्प्रे करने से वह जल्दी होश में आ जाता है।
- मरीज अगर बच्चा हो और स्कूल जाता हो तो क्लास टीचर को इस बारे में सूचना जरूर दें और बताएं कि दौरा आने की हालत में क्या करना है।

मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज....

Vikash Swarnkaar

Author & Editor

Has laoreet percipitur ad. Vide interesset in mei, no his legimus verterem. Et nostrum imperdiet appellantur usu, mnesarchum referrentur id vim.

0 comments:

Post a Comment